किसानों का स्वाभिमान

किसानों का स्वाभिमान

भारत एक कृषि प्रधान देश है व हरियाणा मुख्य रूप से कृषि के लिए जाना जाता है फिर भी 2500 किसान रोज खेती छोड़ रहे हैं। एसा ना हो एक दिन यह विरासत ही खत्म हो जाए जब किसान अपने बेटे के लिए जमीन छोड़कर जाता था। किसान का बेटा कृषि ना करके पढ़ लिख कर शहर में नौकरी करना चाहता है जिससे संतुलन खराब होता है क्योंकि नौकरी होती है 1000 तो आवेदन होते हैं 100000. किसान का बेटा कृषि में ग्रैजुएशन करे और तकनीकों का इस्तेमाल करके कृषि करे तो उत्पादन में उन्नति होगी साथ ही देश भी उन्नति करेगा। इसीलिए एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और कृषि अनुसंधान केंद्रों को बढ़ावा मिलना चाहिए। आज हरियाणा का युवा पढ़ा लिखा व आधुनिक तो है पर उसके पास रोज़गार नही है सरकारी नौकरियाँ हैं नही व गुड़गाँव दिल्ली की बहुराष्ट्रीय कपंनियां हमें लेती नही क्योंकि हमारे skills टैकनालाजी व मैनेजमेण्ट में इतने अच्छे नही।कयोंकि हमारे skills में, हमारे genes में, हमारे ख़ून में कृषि के गुण हैं हमें इसी में आधुनिक रूप से शिक्षित होना है। जैसे दिल्ली या बैगंलोर का बच्चा आज खेती नही कर सकता ऐसे ही वो दिन दूर नही जब हरियाणा का बच्चा भी खेती नही कर पाएगा। आंकडे बताते हैं कि चाइना, जापान, साउथ अफ़्रीका व इंडोनेशिया की तुलना में प्रति हैक्टेयर गेहूँ, धान व मक्का की हमारी पैदावार बहुत कम है। हरियाणा की बात करते हुए वो बोले कि हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश होते हुए भी मध्य प्रदेश, राजस्थान व हिमाचल का गेहूँ हरियाणा से काफ़ी महँगा है। ये विचारणीय है। हमें बीजों की व मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ानी होगी और ये काम कृषि अनुसंधान केन्द्र ही कर सकता है।हमारे खून में कृषि बसी हुई है और हम कृषि में ही ग्रेजुएट होंगे, हम मास्टर्स करेगें लेकिन eco friendly खेती में, organic खेती मे।हम इंजीनियर बनेंगे वैज्ञानिक बनेगें लेकिन agriculture research मेंऔर अपने हुनर को निखारेंगे। कृषि के स्तर को हमे मिलकर ऊपर उठाना होगा।किसान को ताक़तवर बनाना होगा।

स्वo श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने नारा दिया था “जय जवान – जय किसान” इस देश में जय जवान को ध्यान मे रखकर तो उन्हें मूलभूत सुविधाए दि हैं जैसे कि आर्मी स्कूल, आर्मी हॉस्पिटल, आर्मी कैंटीन आदि परंतु किसान को सुविधाएं तो दूर, लागत मूल्य तक सही प्राप्त होता। इसीलिए उन्होंने अपनी दूसरी मांग रखी किसानों के लिए अलग से आधार कार्ड जिसके अंतर्गत उन्होनें किसानों को डीजल, ईंधन व रसोई गैस पर आम आदमी से अधिक सब्सिडी मिले, केन्द्रीय विद्यालयों में किसानों के बच्चों को आरक्षण, राशन डिपो में राशन पर quota हो, सूती कपड़ा व रोजमर्रा का जरूरी सामान सस्ते दामों पर मिले। सभी कृषि उपकरण G.S.T से बाहर हों।सरकारी हस्पताल में अलग किसान वार्ड बने।ECG, ULTRA SOUND व X-ray आदि पर सब्सिडी मिले।

किसानों की welfare पॉलिसी के लिए ‘स्वामी नाथन आयोग’ कई वर्षों से पेंडिंग है पर उनका व संस्था का मानना है कि प्रत्येक राज्य के किसानों की अलग जरूरत व मांग हैं। इसलिए HARYANA में उन्हें ‘Seperate State Commission’ चाहिए।जिसके तहत प्रत्येक तहसील में मिट्टी परीक्षण केंद्र (soil testing centre)हो जहां खेत की खामियों का पता लगाया जा सके व मिट्टी की quality के अनुरूप खेती हो और गुणवत्ता को भी बढ़ाया जा सके। जैसे हम बीमार होते हैं तो blood testing के बाद ही diagnose होता है कि ये रोग है व ये दवाइ लगेगी , इसी तरह soil testing centre ही बताएँगे कि मिट्टी कैसी है व कैसी फ़सल लगेगी। soil card हो हर किसान का जो हर छ महीने में renew हो। हर तहसील में organic कीटनाशक दवाई केंद्र हो। मनरेगा के अंतर्गत टिम्बर व्यवसाय व पशुपालन को प्रोत्साहन मिले। नीम कोटिंग यूरिया केंद्रों को बढ़ावा, फसल बीमा योजना के तहत 7 दिनों में धनराशि का भुगतान, युवाओं को E-commerce, दैनिक डेरी प्रॉडक्ट्स, फल और सब्जियों के थोक व्यवसाय का ग्राम सभाओं द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त हो।

हमारे राज्य में उपरोक्त सभी मांगों व केंद्रों को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक आयोग की आवश्यकता होगी जो सभी सुविधाओं को सही दिशा से देगा। इसीलिए हमें चाहिए अलग से ” हरियाणा राज्य आयोग”. कोई भी सरकार आने से पहले वादा करती है कि हम किसानों का कर्ज माफ करेंगे परन्तु कोई यह नहीं कहता है कि हम ऎसे काम करेंगे कि किसान को कर्ज ही नहीं लेना पड़ेगा लेकिन उपरोक्त ये मांगे ऐसी हैं कि अगर सरकार ने मान ली तो निश्चित रूप से किसान को कर्ज नहीं लेना पड़ेगा।

” हर क़दम, डगर हर
वरूण – एक गूजं
किसानों की हमसफ़र “