मदंसौर : सदमे की सुनामी

मदंसौर : सदमे की सुनामी

7 साल की अबोध बच्ची, जिसके साथ दरिंदगी की सारी हदें पार। शब्दों मे दर्द बयान करना असंभव। मदंसौर सहित सपूंर्ण देश शर्मनाक।मुख्यमन्त्री का बयान कि ” ऐसे दरिन्दे धरती पर बोझ हैं, उन्हें जीने का हक़ नही व फाँसी की सज़ा तय” से उस परिवार के दर्द की पीड़ा तो कम नही परन्तु न्याय की पूरी आस है। लेकिन बेहद विचारणीय ये है कि कठुआ काण्ड हो या मनदसौर ; बड़ा सवाल ये कि बच्चियाँ हवस का शिकार क्यों ? पिछले कुछ समय से नाबालिग़ व नन्ही बच्चियाँ ही शिकार क्यों ?कभी 14 साल की काशिफा, कभी 4 साल की बच्ची , कभी मात्र कुछ महीनों की मासूम और अब ये 7 साल की मासूम!

आख़िर समाज में कौन सी हवा चल उठी है, या यूँ कहूँ के जो तूफ़ान चल पड़ा है वो समाज के नौजवान व आने वाली पीडियों को विनाश के दलदल मे धकेल रहा है। हमें long term solutions के बारे में सोचना होगा कि ये सगींन अपराध कैसे रूकें और कैसे हम अपनी नन्ही परियों की किलकारियों को चीख़ों मे बदलने से बचाएँ , कैसे अपने आसपास महिला समुदाय को sexual harassment से बचा पाएँ । जो आज बाहर हुआ है , वो कल हमारे व आपके घर मे भी हो सकता है, कयोंकि victim हमारे समाज मे से ही तो हैं , कोई अलग दुनिया के नही हैं वो। वैसे भी परसों 29 जून के ‘ Indian Express ‘में Article था जिसका title था कि ‘Where women are without fear’ जिसमें अंकित था कि Indian women दुनिया मे सबसे ज़्यादा शोषित है , even Middle East , Afghanistan व South से भी ज़्यादा ।

क्या ये विचारणीय नही ? ये बेहद ही गम्भीर विषय है ।जिसको सरकार, प्रशासन , आप व मैं मतलब पूरा समाज मिलकर बदल सकता है। किसी एक अकेले institution का बसका ये काम नहीं। First of all तो बच्चियों के साथ दरिंदगी पर fast track courts हों, जिनमे तुरन्त फाँसीं का प्रावधान हो ऐसा ordinance जल्द से जल्द पास हो, कयोंकि बच्ची के साथ हैवानियत की बात manipulated नही हो सकती। दूसरी बात free internet सेवाओं पर कुछ लगाम लगे कयोंकि युवा incompetent education की वजह से Internet सेवाओं से ग़लत बातों मे लिप्त होता है, व pornography को बढ़ावा मिल रहा है व बच्चियों के साथ हैवानियत एक बढ़ा कारण है । महिला सशकितकरण को मज़बूत करने के लिए सालों से रूका हुआ ‘ महिला आरक्षण ‘ बिल पास किया जाए।उपर्युक्त सुझावों में सरकार व प्रशासन को अपनी भूमिका मज़बूत करनी होगी।

अब बात समाज की तो ध्यान दें कि

Gender equality पर हम सबको specially हरियाणा को ख़ास ध्यान देना है। हरियाणा का sex ratio 877/1000 है। जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम सबको बचपन से लड़का व लड़की को बराबर के हक़ व दोनों को एक बराबर इज़्ज़त करने के ससंकारों को सुदृढ़ करना होगा। महिलाओं को बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय invest करके हमारी सभ्यता व संस्कृति से बालकों को अवगत कराना होगा।तथा पिता अपने बच्चों में एक आदर्श छवि स्थापित करें।